RBI EMI Rule: आज के समय में भारत में बहुत से लोग EMI पर इलेक्ट्रॉनिक खरीद लेते है लेकिन लोन की EMI समय पर नहीं चुकाते है। लोन की EMI समय पर नहीं चुकाने से इस पैसे की वसूली के लिए बैंक कर्मचारियों को परेशान को परेशान होना पड़ता है। देश में इसी समस्या पर ध्यान देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक नया नियम ला रहा है जो पहले के नियम से अधिक सख्त होगा। इस नियम को लेन का मकसद मोबाइल, टीवी, वॉशिंग मशीन जैसे सामान के लिए छोटे कर्जा की वसूली को आसान बनाना है। नियम को लाने से पहले RBI ने बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थानों के साथ बातचीत की है।
इस RBI EMI Rule को लेकर कई एक्सपर्ट ने अपनी सलाह दी है। उन्हीं में से एक फाइनेंस एक्सपर्ट आदिल शेट्टी ने कहा कि इस नियम को लेकर RBI को एक खास बात पर ध्यान देने कि जरूरत होगी। लोन के रूप में मिलने वाला कर्ज फोन, लैपटॉप या इस तरह की अन्य चीजें खरीदने के लिए मिलता है जो कोलेटरल-फ्री कर्ज होता है।
कोलेटरल-फ्री कर्ज का मतलब है की इसमें ग्राहक को कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखनी पड़ती है। इसमें ब्याज दर 4-16% होती है। ऐसे में यदि RBI का नया नियम लागू होता है तो ये कर्ज सुरक्षित लोन (जैसे होम, ऑटो लीन) की श्रेणी में आ जायेगा। फिर बैंको को लोन देने से पहले लोन श्रेणी बदलनी पड़ेगी, साथ ही ब्याज दरें कम करनी होगी।
RBI EMI Rule को लेकर 5 पॉइंट्स, जो सबको जानना जरूरी है
1. कैसे लागू किया जाएगा यह नियम?
RBI जिस नये को लागू करने पर विचार रहा है, इस नियम में मुख्य रूप से छोटे उपभोक्ता के लोन आएंगे जैसे मोबाइल, स्मार्ट टीवी, वॉशिंग मशीन, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान पर लोन लिया हो। EMI पर आप प्रोडक्ट लेते है तो पहले से एक एप या सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर दिया जाएगा। यदि किसी भी कारण से EMI नहीं चुकता है तो उस एप या सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रोडक्ट को दूर से लॉक कर दिया जाएगा।
2. क्या खतरा होगा निजी डेटा को?
RBI EMI Rule में यह सुनिश्चित किया जायेगा कि ग्राहक कि पहले सहमति ली जाये और EMI नहीं चुकाने पर फ़ोन लोक होने के बाद ग्राहक का निजी डेटा बिल्कूल सुरक्षित रहना चाहिए। इसका मतलब है कि डिवाइस लॉक करने कि अनुमति बैंको को दी जाये। साथ ही बैंकों को लाखों लोगों के डेटा का एक्सेस मिल जाएगा। बैंकों से ये डेटा लीक हो सकता है। इस डेटा के उपयोग से ब्लैकमेलिंग और फिरौती की घटनाएं बढ़ सकती हैं। RBI और बैंकों को डेटा पहलू पर ध्यान देने कि जरूरत है।
3. क्या हर प्रोडक्ट को लॉक करना संभव है?
इस नए नियम में मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी आदि में यह आसानी लॉक हो सकते है। इसका कारण है कि, इसमें सॉफ्टवेयर मौजूद होता है जिससे दूर से कंट्रोल किया जा सकता है। यह सिस्टम कार और बाइक में पहले से मौजूद है जिसका इस्तेमाल कई देश कर रहे है। इसके अंतगर्त EMI जमा नहीं करवाने पर गाड़ी स्टार्ट नहीं होती है। यदि बात करे घरेलू उपकरण (फ्रिज, वॉशिंग मशीन आदि) को लॉक किया जा सकता है, लेकिन भारत जैसे बाजार में अभी कम है। साथ ही गैर-डिजिटल वस्तुओं में यह संभव नहीं है। ऐसे में पारंपरिक रिकवरी एजेंट क़ानूनी तरीक़े का रास्ता अपनाया जाता है।
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4. कौन-से देश क्या कर रहे हैं?
इस नियम का इस्तेमाल कई देशों में रहा है।
- अमेरिकाः कार लोन में ‘किल स्विच’ तकनीक का उपयोग होता है जिसमे EMI नहीं चुकाने पर कर्जदाता कार को दूर से ही बंद कर सकते है।
- कनाडाः कंपनियां ‘स्टार्टर इंटरप्ट डिवाइस’ लगाती हैं, जो भुगतान नहीं करने पर कार चालू नहीं होने देता।
- अफ्रीका (केन्या, नाइजीरिया आदि): यहां ‘पे-एज-यू-गो’ सोलर सिस्टम नार्मल है। EMI नहीं जमा करने पर कंपनी रिमोटली सोलर पैनल या बैटरी को बंद कर देती है। जैसे ही किस्त भर दी जाती है यह सिस्टम चालू हो जाता है।
5. RBI EMI Rule के फायदा-नुकसान
फायदा: डिवाइस लॉक होने के डर उपभोक्ता समय पर EMI जमा करवाते है जिससे डिफॉल्ट केस घट जाते हैं। कर्जदाताओं का भरोसा बढ़ता है और जिनका क्रेडिट स्कोर कम होता है उनको भी प्रोडक्ट खरीदने का मौका मिल जाता है।
नुकसान: EMI जमा नहीं करवाने पर डिवाइस लॉक हो जाती है और उपभोक्ता अधिकार पर खतरा, जरूरत की सेवाएं (फोन/कार) बंद होने से रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य पर असर पढ़ सकता है।
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EMI पर इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स खरीदने वाले एक-तिहाई के ज्यादा लोग हैं
भारत में इस समय छोटे कर्ज लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही हैं। होम क्रेडिट फाइनेंस की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार देश में लगभग एक-तिहाई से अधिक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, जैसे मोबाइल फोन, EMI पर खरीदे जाते हैं। भारत में लोगों के पास 1.16 अरब से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन हैं। CRIF के अनुसार, देश में 1 लाख रूपये से कम के लोन में डिफॉल्ट लोग सबसे अधिक है। हालाँकि यह स्थिति सुधर सकती है।


